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लांजी/बालाघाट।
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लांजी–किरनापुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक किशोर समरीते ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अनिमेष गढ़पाले पर गंभीर भ्रष्टाचार, अवैध बस संचालन और राजस्व चोरी के संगठित नेटवर्क का आरोप लगाया है। समरीते ने लोकायुक्त पुलिस, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं कई उच्च अधिकारियों को भेजे विस्तृत पत्र में दावा किया है कि लांजी और सालेटेकरी से हैदराबाद, करीमनगर तथा अन्य दक्षिण भारतीय शहरों के लिए चलने वाली बसों से प्रति बस 10,000 रुपये “रूट क्लियरेंस” के नाम पर रिश्वत ली जा रही है। यह सिलसिला पिछले 8 वर्षों से जारी है, जिससे राज्य सरकार को 200 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ है।
टूरिस्ट परमिट और नेशनल परमिट के दुरुपयोग का आरोप
पूर्व विधायक के अनुसार—
लांजी, सालेटेकरी और बालाघाट क्षेत्र से प्रतिदिन 100 से अधिक बसें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के शहरों की ओर जा रही हैं। इनमें से कई बसें—टूरिस्ट परमिट ,नेशनल परमिट,ऑल इंडिया परमिट
का दुरुपयोग करके नियमित यात्री बसों की तरह संचालित हो रही हैं।
टूरिस्ट परमिट में अनियमितता
टूरिस्ट परमिट के नियमों के अनुसार—
यात्रा पूर्व निर्धारित होनी चाहिए
यात्रियों की सूची अनिवार्य है
प्रति यात्री 12 रुपये टैक्स जमा करना होता है
लेकिन समरीते का दावा है कि—
“इन बसों में न कोई सूची बनाई जाती है, न टैक्स जमा होता है। 100 बसों में यदि 40–45 यात्री भी प्रतिदिन यात्रा करते हैं, तो केवल टैक्स चोरी से ही करोड़ों रुपये का नुकसान होता है।”
बिना परमिट बसें बेरियरों से ‘क्लियर’ — रजेगांव, सालेटेकरी और बोनकट्टा पर सवाल
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि—
“रजेगांव, सालेटेकरी और बोनकट्टा बेरियरों पर तैनात कर्मचारी बिना वैध परमिट वाली बसों को विभागीय संरक्षण के साथ प्रवेश कराते हैं।”यह केवल तभी संभव है जब
निरीक्षकों चेक पोस्ट कर्मचारियों और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के बीच संगठित नेटवर्क काम कर रहा हो।8 वर्षों में 200 करोड़ का राजस्व नुकसान कैसे हुआ? शिकायत में दिए गए आँकड़े इस प्रकार हैं—
प्रतिदिन लगभग 100 बसें प्रत्येक बस से 10,000 रुपये वसूली कुल 10 लाख रुपये प्रतिदिन एक वर्ष में 35–40 करोड़ रुपये 8 वर्ष में लगभग 200–300 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान
समरीते का आरोप है कि परिवहन अधिकारी और बिचौलिए मिलकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं।
अधिकारी की संपत्ति 10 गुना बढ़ी — 8 वर्षों से एक ही जिले में पदस्थ
समरीते ने पत्र में लिखा—
“अनिमेष गढ़पाले 8 वर्षों से लगातार बालाघाट में पदस्थ हैं। इस अवधि में उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई है, जो भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत है। राज्य शासन ने इस पर कभी गंभीरता से जांच नहीं की।”
स्थानीय मजदूरों पर प्रभाव — 6 लाख लोगों का पलायन भी विवाद का हिस्सा
पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि—
“अवैध बस संचालन और अनियंत्रित यात्रा व्यवस्था के कारण पिछले वर्षों में लगभग 6 लाख मजदूर बेहतर अवसर की तलाश में बाहर राज्यों में पलायन कर चुके हैं। यदि स्थानीय परिवहन व्यवस्था नियंत्रित और व्यवस्थित होती, तो मजदूरी और रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर बढ़ सकते थे।”
कार्यालय में हर कार्य की ‘रेट लिस्ट’ — भ्रष्टाचार का जाल गहरा शिकायत के अनुसार—
बिचौलिए लाइसेंस, परमिट, फिटनेस, ट्रांसफर और अन्य विभागीय सेवाओं के लिए अलग-अलग राशि वसूलते हैं। समरीते ने आरोप लगाया— “कई काम जो नियम अनुसार मुफ्त होने चाहिए, वे भी पैसों के बिना नहीं होते। सरकारी कार्यालय में कामकाज का पूरा सिस्टम ‘रेट कार्ड’ पर चल रहा है।”
डिप्टी कमिश्नर के रिटायरमेंट के नाम पर भी रिश्वत वसूली का आरोप
पूर्व विधायक ने दावा किया कि—
“डिप्टी कमिश्नर जितेंद्र रघुवंशी के आगामी 1 दिसंबर को रिटायरमेंट होने की आड़ में विभागीय बाबू 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति की वसूली कर रहे हैं। यह बात स्वयं कर्मचारियों और वाहन मालिकों ने स्वीकार की है।”
लोकायुक्त, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और परिवहन आयुक्त को भेजी शिकायत
समरीते ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि निम्नलिखित को भेजी है—
लोकायुक्त पुलिस, भोपाल
मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
मुख्य सचिव
प्रमुख सचिव परिवहन
परिवहन आयुक्त, ग्वालियर
नेता प्रतिपक्ष, म.प्र. विधानसभा
उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और अधिकारी की लगातार पोस्टिंग एवं वित्तीय जांच भी की जाए।
स्वतंत्र जांच की माँग, स्थानीय राजनीति में हलचल
इस शिकायत के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।परिवहन विभाग पर यह आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर रिश्वत और राजस्व नुकसान का दावा पहली बार प्रमुखता से सामने आया है।
यदि लोकायुक्त पुलिस प्रारंभिक स्तर पर भी आरोपों की पुष्टि करती है, तो यह मध्यप्रदेश के हाल के वर्षों का सबसे बड़ा परिवहन घोटाला हो सकता है।
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