बालाघाट। भारत में चुनाव आयोग के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और जनगणना आयोग द्वारा ओबीसी वर्ग की जनगणना नहीं कराए जाने के फैसले के बाद देश में आरक्षण को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इसी कड़ी में संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक किशोर समरीते ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर आरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व विधायक किशोर समरीते ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया है कि केंद्र या राज्य सरकार 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दे सकती। इसी आधार पर उन्होंने भारत सरकार से सवाल किया है कि यदि देश में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया गया है, तो फिर यह 50 प्रतिशत आरक्षण आखिर किन वर्गों को दिया जा रहा है। किशोर समरीते का आरोप है कि देश की कुल आबादी में मात्र 1.5 से 3 प्रतिशत तक की जनसंख्या वाले ऐसे लोग, जो आरक्षण की वास्तविक पात्रता नहीं रखते, उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर, देश की लगभग 85 प्रतिशत आबादी वाले वर्गों को भी केवल 50 प्रतिशत आरक्षण तक ही सीमित रखा गया है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया। पूर्व विधायक ने कहा कि ओबीसी जनगणना नहीं कराए जाने से वास्तविक सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़े वर्गों की सही स्थिति सामने नहीं आ पा रही है, जिससे आरक्षण की नीति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए भारत सरकार से सीबीआई जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरक्षण का वास्तविक लाभ किन वर्गों तक पहुंच रहा है और किन्हें इससे वंचित किया जा रहा है। श्री समरीते ने यह भी कहा कि जब तक देश में सभी वर्गों की पारदर्शी और वैज्ञानिक जनगणना नहीं होगी, तब तक आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद और असंतोष बना रहेगा।
बालाघाट। भारत में चुनाव आयोग के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और जनगणना आयोग द्वारा ओबीसी वर्ग की जनगणना नहीं कराए जाने के फैसले के बाद देश में आरक्षण को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इसी कड़ी में संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक किशोर समरीते ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर आरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व विधायक किशोर समरीते ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया है कि केंद्र या राज्य सरकार 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दे सकती। इसी आधार पर उन्होंने भारत सरकार से सवाल किया है कि यदि देश में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया गया है, तो फिर यह 50 प्रतिशत आरक्षण आखिर किन वर्गों को दिया जा रहा है। किशोर समरीते का आरोप है कि देश की कुल आबादी में मात्र 1.5 से 3 प्रतिशत तक की जनसंख्या वाले ऐसे लोग, जो आरक्षण की वास्तविक पात्रता नहीं रखते, उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर, देश की लगभग 85 प्रतिशत आबादी वाले वर्गों को भी केवल 50 प्रतिशत आरक्षण तक ही सीमित रखा गया है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया। पूर्व विधायक ने कहा कि ओबीसी जनगणना नहीं कराए जाने से वास्तविक सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़े वर्गों की सही स्थिति सामने नहीं आ पा रही है, जिससे आरक्षण की नीति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए भारत सरकार से सीबीआई जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरक्षण का वास्तविक लाभ किन वर्गों तक पहुंच रहा है और किन्हें इससे वंचित किया जा रहा है। श्री समरीते ने यह भी कहा कि जब तक देश में सभी वर्गों की पारदर्शी और वैज्ञानिक जनगणना नहीं होगी, तब तक आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद और असंतोष बना रहेगा।

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