मछली पालन से हर साल 75–80 हजार की अतिरिक्त आय, जीवन स्तर में आया बड़ा बदलाव
संपादक – महेन्द्र धुर्वे | News Today
बालाघाट/लालबर्रा। मनरेगा के तहत संचालित मीनाक्षी तालाब योजना अब ग्रामीण आजीविका का मजबूत स्तंभ बनती जा रही है। लालबर्रा विकासखंड के ग्राम खुरपुड़ी के किसान अशोक पिता मोतीलाल इसका जीवंत उदाहरण हैं। वर्ष 2021 में मनरेगा के तहत 3 लाख 40 हजार रुपये की लागत से उनके खेत में बना मीनाक्षी तालाब अशोक के जीवन में बड़ा परिवर्तन लेकर आया।
पहले जहां अशोक केवल धान की खेती पर निर्भर थे, वहीं अब तालाब के कारण उन्हें स्थायी और सुनिश्चित अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिल गया है।
धान की खेती से सीमित आय, तालाब ने दिया नया अवसर
अशोक बताते हैं कि उन्हें धान की खेती से इतनी आय नहीं हो पाती थी कि परिवार की सभी जरूरतें सहजता से पूरी कर सकें। तालाब बनने के बाद उन्होंने रोहू, कतला, मृगल और ग्रासकार्प प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया। शुरुआती प्रयास सफल हुए और यह काम धीरे–धीरे उनकी स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन गया।
हर साल 75–80 हजार की कमाई, अब तक 3.50 लाख की आय
मछली पालन से अशोक को प्रतिवर्ष 75 से 80 हजार रुपये की आय होने लगी। तालाब बनने के बाद से अब तक वे करीब 3 लाख 50 हजार रुपये कमा चुके हैं।
तालाब का दूसरा बड़ा लाभ यह मिला कि अब वे अपनी खेती की सिंचाई इसी पानी से करते हैं। सिंचाई उपलब्ध होने से धान उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई और कुल आय दोगुना प्रभाव दिखा रही है।
अशोक कहते हैं कि—
"पहले गुज़ारा चलाना कठिन हो जाता था, पर अब नियमित आय से घर, बच्चों की पढ़ाई और बाकी ज़रूरतें आराम से पूरी हो जाती हैं। जीवन में स्थिरता आ गई है।"
ग्रामीण आजीविका का मजबूत आधार बन रही मीनाक्षी तालाब योजना
अशोक की सफलता साबित करती है कि मनरेगा की मीनाक्षी तालाब योजना सिर्फ जल संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि आजीविका सृजन की प्रभावी योजना है।
यह किसानों को अतिरिक्त आय, सिंचाई सुविधा और स्थायी रोजगार प्रदान कर रही है। अशोक जैसे किसानों के अनुभव गांवों में प्रेरणा बन रहे हैं और योजना की उपयोगिता को और मजबूत कर रहे हैं।

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