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संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही सांसद भारती पारधी सक्रिय

 


नियम 377 के तहत बच्चों के पोषण और आंगनबाड़ी सुधार का विषय मजबूती से उठाया

संपादक – महेन्द्र धुर्वे | News Today

नई दिल्ली/बालाघाट। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन बालाघाट–सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती भारती पारधी ने छोटे बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा तथा आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता सुधार से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा सदन में जोरदार ढंग से उठाया।
नियम 377 के तहत सांसद पारधी को 7वें वक्ता के रूप में बोलने का अवसर मिला, जो उनकी सक्रियता, तत्परता और जनहित के प्रति उनकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नियम 377 में प्रतिदिन सीमित 30 सांसदों को ही बोलने का मौका मिलता है।


आंगनबाड़ी प्रणाली को आधुनिक व आकर्षक बनाने पर जोर

सांसद पारधी ने महिला एवं बाल विकास मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि निजी प्ले स्कूलों के बढ़ते प्रभाव की वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की उपस्थिति कम होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि कभी आंगनबाड़ी बच्चों के निःशुल्क पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और पहले विद्यालय के रूप में पहचानी जाती थीं, लेकिन अब वे अपनी मूल पहचान खोने लगी हैं।
इसीलिए उन्हें आधुनिक, आकर्षक और समयानुकूल बनाने की आवश्यकता है।


सांसद द्वारा सदन में रखी गई प्रमुख माँगें

सांसद पारधी ने आंगनबाड़ी सुधार के लिए कई ठोस सुझाव प्रस्तुत किए—

  • विद्यालय में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की जाए।

  • आंगनबाड़ी पूर्ण करने वाले बच्चों को पासआउट प्रमाणपत्र दिया जाए ताकि उन्हें सीधे स्कूल में प्रवेश मिल सके।

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पेशेवर शिक्षक जैसा प्रशिक्षण दिया जाए।

  • 3 वर्ष के बच्चों के लिए आयु-वार संरक्षित पाठ्यक्रम व वार्षिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य की जाए।

  • केंद्रों में पर्याप्त स्टोरेज, मोबाइल रजिस्टर, ग्रोथ चार्ट, शिक्षण खिलौने और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।

  • सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को विभागीय भवनों में संचालित किया जाए ताकि सुरक्षित व स्थायी वातावरण मिले।

  • पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल साधनों को लागू कर पेपरलेस व्यवस्था अपनाई जाए।

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्थायी कर्मचारी का दर्जा, अलग मानदेय और स्पष्ट पदोन्नति नियम बनाए जाएँ।

  • बच्चों की निगरानी के लिए हर केंद्र पर डिजिटल वेट मशीन अनिवार्य की जाए।


सांसद की पहल को मिली सराहना

सांसद भारती पारधी द्वारा उठाया गया मुद्दा देश के लाखों बच्चों, माताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन सुधारों को लागू किया गया, तो आंगनबाड़ी केंद्र अधिक प्रभावी, सक्षम और बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।

सत्र के पहले ही दिन इतने महत्वपूर्ण विषय को प्राथमिकता के साथ उठाकर सांसद पारधी ने यह साबित कर दिया कि वह न केवल अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जागरूक हैं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी सदैव सक्रिय रहती हैं।

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